ठाकुर की दया से जितना उनको जाना

20 जून 2018

। । परमानन्द परमानन्द । ।


परमानन्द परमानन्द परमानन्द पुरूषोत्तम
शून्य हो या शून्यविज्ञ हो विश्वभावन पुरूषोत्तम
वेद हो या वेदविज्ञ ब्रह्य हो पुरूषोत्तम
अनल हक जो ध्यानी कहते आदिकारण पुरूषोत्तम
तत्व हो या तत्वविज्ञ पूर्ण हो पुरूषोत्तम
सत्य पथ पर चल सकूं जगनिवास पुरूषोत्तम
अमित अगाध हो या अनन्त असंख हो पुरूषोत्तम
विश्वव्यापी चेतना का अप्रमाण हो पुरूषोत्तम
-पुष्पा बजाज, शिलोंग.

18 जून 2018

पुरूषोत्तम भजन - २


। । पुरूषोत्तम भजन । ।

नमो नमो नमो नमो, नमो नमो नमो नमो
प्रभु पुरूषोत्तम! अनुकुलाय, आदि देवाय नमो नमो

अनन्तरूपाय अतीन्द्रियाय, अव्यक्त रूपाय नमो नमो
अद्भुताय अधृताय आदि देवाय नमो नमो

अनन्ताय आदित्याय अमृताय नमो नमो
अव्ययाय अचिन्त्याय अव्यक्ताय नमो नमो

अनुत्तमाय अमृतपाय अधिष्ठानाय नमो नमो
अच्युताय आनंदरूपाय अक्षराय नमो नमो

                                   -पुष्पा बजाज

पुरुषोत्तम भजन-२


परम प्रेममय श्री श्री ठाकुर अनुकुलचंद्र

। । पुरूषोत्तम वन्दना। ।
पुरूषोत्तम की करूं वन्दना, पुरूषोत्तम को नमन करूं।
जनम जनम मैं करूं वन्दना, जनम जनम मैं नमन करूं। ।

आदि अनादी पुरूषोत्तम प्रभु, शत् शत् तुमको नमन करूं।
हे सुख रंजन हे दुख भंजन, सादर तुमको नमन करूं। ।
अखिल लोक के पालन हारे, कोटि कोटि नमन करूं।
कण कण में प्रभु छवि तुम्हारी, प्राणों से मैं नमन करूं। ।

हे प्रभु तुम दया के सागर, महिमा कैसे वर्णन करूं।
हे पुरूषोत्तम हे सर्वोत्तम, श्वास श्वास से नमन करूं। ।
जीवन मेरा चरणों में अर्पित, सव-भाव से नमन करूं।
हर जनम रहुं तेरा पुजारी, पल पल क्षण क्षन जतन करूं। ।

हे अखिलेश्वर हे सर्वेश्वर, रोम रोम से नमन करूं।
हे पुरूषोत्तम पथ पर तोरे, जनम जनम मैं चला करूं। ।
अखंड अलौकिक रूप तुम्हारा, शोभा कैसे वर्णन करूं।
शरण में अपनी ले लो मुझको, हाथ जोड तोरे चरण पडुं। ।
                                              
                                                        -पुष्पा बजाज, शिलोंग.